Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui
जमशेद क़मर सिद्दीकी के साथ चलिए कहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नुक्कड़ पर एक नया किरदार है, नए क़िस्से, नए एहसास के साथ. ये कहानियां आपको कभी हसाएंगी, कभी रुलाएंगी और कभी गुदगुदाएंगी भी.
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- Sep 4, 2026
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- Jul 4, 2026
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कृष्ण जन्म कथा: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद (opens the original)
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जन्माष्टमी के मौके पर आज स्टोरीबॉक्स में ख़ास कहानी जो दरअसल नज़ीर अकबराबादी की एक मसनवी है. इसका नाम है 'कृष्ण जन्मकथा' जिसमें भगवान कृष्ण के जन्म, कंस की साज़िशें और वसुदेव का उन्हें उफ़नती हुई यमुना से गोकुल ले जाने के सारे मंज़र हैं. सुनिए नज़ीर अकबराबादी की लिखी कथा जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Suraj Singh & Rohan Bharti
आख़िरी उम्र का इश्क़: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद (opens the original)
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ये कहानी एक ऐसे अमीर रईस की है जो चालीस साल के बाद अपने उस इश्क़ की तरफ़ लौटता है जिसे वो जवानी में छोड़ आया था. वो इश्क़ जो उसे इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि वो बगावत नहीं कर पाया था अपने वालिद से... लेकिन अब जब वो उम्र के उस मोड़ पर है जहां वो तन्हा है, अकेला है तो वो उस आफ़रीन को ढूंढता है जिसे छोड़कर आया था. अब आफ़रीन कैसी है, कहां है, क्या हुआ था उसके साथ और क्या वो खां साहब को दोबारा अपनाएगी? देखिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'आख़िरी उम्र का इश्क़' स्टोरीबॉक्स में. Narrator - Jamshed Qa
मैंने पुरानी कार क्यों खरीदी?: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद (opens the original)
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ज़िंदगी में सब कुछ कीजिएगा लेकिन कभी पुरानी कार मत ख़रीदना. क्योंकि जिस दिन आप पुरानी कार ख़रीद लेंगे उसी दिन से आपके बुरे दिन शुरू हो जाएंगे. हमने भी अपनी ज़िंदगी में एक बार ये ग़लती की थी. एक पुरानी सी खटारा हमें पसंद आ गई क्योंकि बड़ी सस्ती थी. कार खरीद ली गई लेकिन उस दिन के बाद से हम भूल गए कि चैन की नींद क्या होती है? ऐसा कोई महीना नहीं गुज़रा जब गाड़ी को उसके ससुराल यानि कारखाने न ले जाना पड़ा हो. कारखाने वाला जो आदमी था वो हर महीने मेरी तनख्वाह में बराबर का हिस्सेदार हो गया था. स्टोरीबॉक्
कारगिल शहीद की सगाई अंगूठी: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद (opens the original)
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ये कहानी है कारगिल जंग में शहीद हुए कैप्टन अनुज नैय्यर की, जो सगाई की अंगूठी उंगली में पहने जंग के मोर्चे पर जाने की तैयारी कर रहे थे. तभी उन्होंने अपने कमांडिग ऑफ़िसर से पूछा कि "सर, क्या मुझे अंगूठी पहनकर जंग में जाना चाहिए? क्योंकि अगर मैं वापस नहीं आया तो ये अंगूठी दुश्मनों के हाथ लग जाएगी". सुनिए सच्ची कहानी उस जांबाज़ की जिसने महज़ 24 साल की उम्र में अपने मुल्क के लिए मुहब्बत की राह में अपनी जान कुर्बान कर दी. फ़ैशन इंस्टीट्यूट जाने की तमन्ना रखने वाले, बॉम्बे बॉइज़ म्यूज़िक एल्बम के फ़ैन
उर्दू शायरी के प्लेबॉय: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद (opens the original)
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ये कहानी है उर्दू के शायर दाग़ देहेलवी की, जिनको ख़ूबसूरती का आशिक़ कहते हैं और बोला जाता है कि उनके कई औरतों से रिश्ते रहे. मुगल बादशाह के बेटे से उनकी मां की शादी हुई तो वो लाल क़िले में रहने लगे जिसके बाद उनके पास हर ऐश ओ आराम था. दाग़ देहेलवी ने बचपन में ज़िंदगी की बदसूरत यादों को आसपास फैली रंगीनियों से भरने की कोशिश की, लेकिन उससे बड़ी हक़ीकत ये है कि उनके काम ने उर्दू शायरी को नई ज़मीन और नया आसमान दिया. सुनिए दाग़ के पिता को अंग्रेज़ी हुकूमत ने क्यों मारा था? और कहानी उस मर्डर मिस्ट्री क
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