Gurudev Ojaswi Sharma Ji
This Podcast is a tribute to our most respected Gurudev Shri Ojaswi Sharma ji and his teaching. All material on this podcast has been adapted by seekers from original recordings of Satsangs and letters of Gurudev Shri Ojaswi Sharma.
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- Sep 17, 2026
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- Jul 3, 2026
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।। अपना मान लो भगवान को ।। (opens the original)
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* अपना मान रखा है संसार और भजन कर रहे हैं भगवान का, कुछ नहीं होने वाला ! * भगवान को नौकर बना रखा है, मेरा काम चमकाओ, बिजनेस बढ़ाओ * जिसको अपना माना, उस में प्रेम हो जाता है * भगवान की प्राप्ति के लिए घर छोड़ा, तो भगवान बिल्कुल भी मिलेंगे नहीं * जहां हो वहीं रहो जो काम मिला है वही करते रहो खाना बनाने का है खाना बना कपड़े धोने का है कपड़े धो, नीयत सेवा की कर लो * बच्चों में आसक्ति छोड़नी है ? उनको अपने बच्चे मत मानो, भगवान है ये, इनका कार्य करना भगवान की सेवा है * जब समझने से नहीं मानता तो भगवान का
।। भगवान planning तोड़ते है ।। (opens the original)
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* जितना भागवत प्राप्ति के विज्ञान का प्राकट्य भारत देश में हुआ है, उतना और कही नहीं हुआ है * कीर्तन, जप, भगवान का नाम, पवित्र करता है * इस संसार में एकदम कुछ भी हो सकता है, इस लिए जल्दी से जल्दी जागरण हो जाए * शुभ कर्म भगवान की कृपा से होते है, अशुभ कर्म मानव के अहंकार से होता है * वही शिव है, वही महावीर है, वही राम है, वही मोहम्मद हैं * ना इस संसार से भागना है, ना इसको भोगना है, यहां तो जागना है !!! * गलती को गलती स्वीकार करो और उनसे प्रार्थना करो * प्रदर्शन जीवन में नहीं होना चाहिए * पक्का विश
।। अपने दोष, दूसरों के गुण ।। (opens the original)
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* प्रभु से प्रार्थना करो कि अपने दोष दिखाई दें * अध्यात्म का मार्ग, एक वैज्ञानिक मार्ग है * Benjamin Franklin अपने दोष लिख कर कुछ दिन बाद देखते थे कि वे कितने कम हुए * जब किसी जीवात्मा में कोई भी कामना रहेगी, जन्म होता रहेगा
।। भगवान तो प्राप्त ही है ।। (opens the original)
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* चित्त भोगासक्ति में लगा है, इस लिए अनुभव नहीं हो रहा * मन अपने को ठग रहा है * आप लोगों को सुनने का व्यसन पड़ गया है, करते धरते कुछ नहीं * सीखने और जानने में अंतर होता है * कितने लोगों में यह भावना है, शरीर जाता हो तो चला जय ? आसक्तियां भरी पड़ी हैं * जितनी लगन से डिग्रियां प्राप्त करी हैं, वह इस बात के लिए नहीं है * सभी को भगवान का अंश मानकर उनकी सेवा में रस लो, इस जगत की सेवा में अपने को राख बनाना पड़ता है * भाव तो रखना है शुद्ध, व्यवहार वो जो जरूरत है
।। घटनाओं का रहस्य ।। (opens the original)
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जैसे ही कोई परमात्मा की तरफ चलना शुरू करता है, अंदर से नई नई बातें उभर कर आती है, वह सब बाहर निकलती हुई दिखती हैं ऐसी घटनाओं से अहंकार कटता है ' कर्तव्यों पर आश्रित होना छोड़ दे, कर्म कर, आश्रय मेरा ' अपना प्रयत्न, निर्भरता भगवान पर भगवान को भूले खुराफात दिखी " मैने अपने साधना में, गंदे विचार से कहा, तू ही रह, तुझे जाने नहीं दूंगा, वह टीका ही नहीं " भगवान प्राप्ति हर समय है, तुम्हारा ध्यान और चीजों में पड़ा हुआ है, जितना उधर से हटे, उतना ही ,प्राप्त भगवान का अनुभव हो जाएगा
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